हल्द्वानी। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शुक्रवार को खालसा इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में भारत विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले शहीदों और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में विभाजन की त्रासदी झेल चुके बुजुर्गों ने अपने अनुभव साझा किए तो माहौल भावुक हो उठा। इस दौरान दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत विभूतियों को नमन किया गया और देश की एकता-अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नगर निगम हल्द्वानी के महापौर गजराज सिंह बिष्ट, दर्जा राज्यमंत्री नवीन लाल वर्मा, विभाजन का दंश झेल चुके सरदार बलवंत सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। वक्ताओं ने कहा कि विभाजन का इतिहास बेहद पीड़ादायक रहा है। लाखों लोगों को अपना घर, जमीन, संपत्ति और रिश्ते-नाते छोड़कर विस्थापित होना पड़ा, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने अपने प्राण गंवाए।
महापौर गजराज सिंह बिष्ट ने कहा कि विभाजन की पीड़ा को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि समाज अपने इतिहास से सीख सके। उन्होंने कहा कि इतिहास को भुलाने वाला समाज दोबारा वही गलतियां कर सकता है। दर्जा राज्यमंत्री नवीन वर्मा ने कहा कि अंग्रेजों ने केवल देश की सीमाओं का बंटवारा नहीं किया, बल्कि लोगों के बीच के प्रेम, सम्मान और भाईचारे को भी प्रभावित किया। उन्होंने विभाजन की त्रासदी से सीख लेते हुए आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी ने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों ने अपना घर-बार और जमीन छोड़कर नए स्थान पर जीवन शुरू किया। उस दौर की बर्बरता और अमानवीय हिंसा को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि स्मृति दिवस का उद्देश्य नई पीढ़ी को उस त्रासदी से अवगत कराना और देश की एकता व अखंडता के प्रति जागरूक करना है।
कार्यक्रम में विभाजन के समय विस्थापन का दर्द झेलने वाले बुजुर्गों को सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह उन्हें अपना घर छोड़कर नए स्थान पर शरण लेनी पड़ी थी। स्कूली बच्चों ने देशभक्ति गीत और निबंध प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, छात्र-छात्राओं, सामाजिक संगठनों और आमजन ने भाग लिया। इस अवसर पर बलबीर सिंह, जसपाल सिंह, अवनीश सिंह, हरजीत सिंह, रंजीत सिंह, बलवंत सिंह, हरीश बिष्ट, प्रधानाचार्य डॉ. कल्पना जोशी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।






