21 साल की उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, सात कार्मिकों को मिला सम्मान..

भगत सिंह कोश्यारी ने किया भारतीय ज्ञान परंपरा को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने का आह्वान, कुलपति प्रो. लोहनी ने गिनाईं विश्वविद्यालय की उपलब्धियां

हल्द्वानी। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने शनिवार को अपना 21वां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में शिक्षा, नवाचार और तकनीकी विस्तार के साथ संस्थान की 21 वर्षों की विकास यात्रा को रेखांकित किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय की प्रगति में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सात कार्मिकों को सम्मानित किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति एवं उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक तथा श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन मौजूद रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ संगीत विभाग के शिक्षार्थियों की समूहगान, शास्त्रीय संगीत और उत्तराखंड के लोकगीतों की प्रस्तुतियों से हुआ। योग विभाग के शिक्षार्थियों ने आकर्षक योग प्रदर्शन कर अतिथियों का ध्यान खींचा। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

स्वागत संबोधन में CIQA निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने विश्वविद्यालय की 21 वर्षों की उपलब्धियों और विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने डिजिटल माध्यमों, सामुदायिक रेडियो ‘हैलो हल्द्वानी 91.2 एफएम’ और क्षेत्रीय अध्ययन केंद्रों के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक उच्च शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने संस्थापक टीम के योगदान की सराहना की, जबकि प्रो. विनय कुमार पाठक ने शुरुआती चुनौतियों को याद करते हुए मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा को भविष्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया।

मुख्य अतिथि भगत सिंह कोश्यारी ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को कौशल आधारित पाठ्यक्रमों से जोड़ने की जरूरत है। शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें ज्ञान, कौशल और जीवनोपयोगी दक्षताओं का समन्वय होना चाहिए।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रगति में योगदान के लिए हेम चन्द्र छिम्वाल, विनोद बिरखानी, कंचन बिष्ट, अनिल नैलवाल, मोहन चन्द्र पांडे, चन्द्रशेखर सुयाल एवं व्यास सिंह को सम्मानित किया गया।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियां गिनाते हुए प्रवेश संख्या में वृद्धि, अध्ययन सामग्री वितरण व्यवस्था में सुधार और परीक्षाओं के समयबद्ध आयोजन को प्रमुख उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने मात्र 20 दिनों में परीक्षा परिणाम घोषित करने की व्यवस्था विकसित की है। नवप्रवेशित शिक्षार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम और सामुदायिक रेडियो सहित डिजिटल माध्यमों से ऑडियो-वीडियो शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने की पहल भी शिक्षा को अधिक सुलभ बना रही है।

उन्होंने पूर्व कुलपतियों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों के योगदान के प्रति आभार जताते हुए भविष्य में नवाचार, सामूहिक सहभागिता और समर्पण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

समारोह में सांस्कृतिक एवं योग प्रस्तुतियों में शामिल शिक्षार्थियों और प्राध्यापकों को भी प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शशांक शुक्ला एवं डॉ. सुचित्रा अवस्थी ने किया। कुलसचिव खेमराज भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के निदेशक, प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी और शिक्षार्थी मौजूद रहे। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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