हल्द्वानी। कुमाऊं के सबसे बड़े डॉ सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय और राजकीय मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 659 उपनल कर्मचारियों के सामने बहुत बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। आपको बता दे कि कर्मियों को छह माह से वेतन नहीं मिला है, जिस कारण कर्मियों में काफी आक्रोश है। लगभग 15 दिनों से वेतन दिए जाने की मांग को लेकर कर्मियों का कार्य वहिष्कार जारी है, जिससे अस्पताल की व्यवस्था भी चरमराई हुई है, बावजूद इसके अभी तक अस्पताल प्रबंधन द्वारा कोई रास्ता नहीं निकाला गया है।

आज बुधवार को उपनल कर्मियों ने भीख मांग कर अपना विरोध व्यक्त किया। कर्मी प्राचार्य कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर अरुण जोशी ने कर्मियों को आश्वासन देने की कोशिश की, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
कर्मियों ने बताया कि छह माह से वेतन न मिलने से उनके बच्चों के स्कूल की फीस नहीं जा पा रही है,जिससे बच्चों के घर बैठने का खतरा उत्पन्न हो गया है। जो कर्मी किराए के मकान में रह रहे हैं उन्हें मकान मालिक द्वारा कमरा खाली करने को कहा जा रहा है। कहा उनके सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है।
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर कॉलेज प्रशासन के साथ-साथ मुख्यमंत्री और शासन स्तर पर भी गुहार लगाई, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में अब सुशीला तिवारी अस्पताल के मुख्य गेट पर तालाबंदी करने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं बचा है।
उपनल कर्मचारी का कहना है कि वो पिछले 20 से 25 साल से सुशीला तिवारी अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. यही नहीं कोविड काल के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात मरीजों की सेवा की, लेकिन आज सरकार ने उनके पद सृजित नहीं होने का हवाला देखकर वेतन को रोक दिया है, जिसके चलते उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सुशीला तिवारी अस्पताल के प्राचार्य डॉ अरुण जोशी ने बताया कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर शासन स्तर पर वार्ता चल रही है. जल्द समाधान निकालने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसके उपरांत शाम 7 बजे कर्मचारियों ने सुशीला तिवारी अस्पताल से कैंडल मार्च निकाला, जिसका समापन कालाढूंगी चौराहे पर हुआ। इस दौरान शंभू दत्त बुधानी, नीरज हे, प्रताप बोरा,मोहन रावत, राजेंद्र सिंह बिष्ट, नीलम बिष्ट, दीपा शर्मा,कविता मनराल, उमा डांगी सहित सैकड़ों कर्मी मौजूद रहे।











