हल्द्वानी। भोटिया पड़ाव स्थित चंदन अस्पताल में मंगलवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं और एमबीपीजी कॉलेज के छात्रसंघ पदाधिकारियों ने दिनभर हंगामा किया। दरअसल, पिछले दिनों एक मरीज को जिंदा होने के बावजूद अस्पताल रिकॉर्ड में मृत दिखाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मामले की शिकायत लेकर पहुंचे एमबीपीजी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष अभिषेक गोस्वामी के साथ अभद्रता की गई है। इस दौरान प्रदर्शनकारी जिंदा व्यक्ति को मृत दिखाने वाले डॉक्टर को अस्पताल से निष्कासित करने और अस्पताल में अभिषेक के साथ अभद्रता करने वाले शख्स से सार्वजानिक माफी मांगने की मांग कर रहे थे। वहीं, अस्पताल परिसर में तनाव बढ़ने के बीच पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई और हालात संभालने की कोशिश की। पुलिस की मध्यस्तथा में अस्पताल प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत चली लेकिन बात नहीं बनी। छात्रनेता अभद्रता करने वाले शख्स से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मंगवाने की जिद्द पर अड़े रहे।
कई दौर की वार्ता हुई फेल, तीखी नोकझोंक
प्रदर्शनकारी सुबह करीब 11 बजे से अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए थे और लगातार छात्रनेता के साथ अभद्रता करने वाले शख्स से सार्वजानिक माफी मांगने की मांग कर रहे थे। कई दौर की बातचीत विफल रहने के बाद प्रदर्शनकारी बिफर गए और अस्पताल के सीईओ राज गोपाल व अन्य कर्मचारियों से तीखी बहस हो गई।
जब अस्पताल के सीईओ बोले- करते रहेंगे ऐसा!
तीखी नोकझोंक के बीच छात्रसंघ अध्यक्ष अभिषेक गोस्वामी ने अस्पताल के सीईओ राज गोपाल से कहा, “बाकी सब छोड़िए, यहां क्या-क्या मामले हो रहे हैं क्या आपको पता हैं।” इस पर राज गोपाल ने कहा, “पता हैं सर, मैं बताता हूँ…जो भी मामले हैं कोर्ट में हैं…कोर्ट में हमने सब कुछ सबमिट किया है।” इसके बाद अभिषेक ने कहा, “…तो आप करते रहोगे मामले ऐसे…करते रहोगे…?” इस पर राज गोपाल ने कहा, “…हाँ हम करेंगे।” ये जवाब सुनते ही प्रदर्शनकारियों का पारा चढ़ गया। उन्होंने इस बयान को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए फिर से हंगामा करना शुरू कर दिया।
सिटी मजिस्ट्रेट और मेयर भी पहुंचे
वहीं, हंगामा बढ़ने के बीच सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेयी भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। इसी बीच मेयर गजराज बिष्ट भी मौके पर पहुंच गए और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र फिर भी अपनी मांग पर अड़े रहे।
अस्पताल प्रबंधन बोला- अभद्रता करने वाला हमारा कर्मी नहीं, बाद में मौके पर बुलाया
प्रदर्शन के बीच अस्पताल प्रबंधन ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि अभद्रता करने वाला अस्पताल का कर्मचारी नहीं है। इस दौरान राज गोपाल और अस्पताल से जुड़े परवेज यह भी कहते रहे कि अभद्रता करने वाला शख्स वहां मौजूद नहीं है। इस दौरान आक्रोशित छात्रों ने कथित तौर पर अस्पताल परिसर में हल्की तोड़-फोड़ भी कर दी।
शाम करीब सवा चार बजे प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और उन्होंने अस्पताल का रिसेप्शन काउंटर बंद करा दिया और दवा काउंटर भी बंद कराने लगे। हालांकि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद वे दवा काउंटर बंद करवाने में असफल रहे। हल्द्वानी के सीओ अमित कुमार ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने।
छात्र नेता आरोपी को मौके पर बुलाने की मांग करने लगे। इस बीच छात्र संघ अध्यक्ष अभिषेक गोस्वामी से कथित तौर पर अभद्रता करने वाला युवक अस्पताल के अंदर माफी मांगने पहुंच गया। छात्र अस्पताल के बाहर माफ़ी मंगवाने की जिद्द पर अड़ गए। हालांकि, कुछ देर मौके पर मौजूद रहने के बाद आरोपी ने माफी मांगी और कमरे के अंदर चला गया। चर्चा है कि अभद्रता करने का आरोपी युवक उस भवन का मालिक है जिसमें अस्पताल संचालित हो रहा है।
सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपने के बाद मामला हुआ शांत
जब आरोपी युवक माफी मांगने के लिए अस्पताल के बाहर नहीं आया तो आक्रोशित छात्र नेताओं ने सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेयी को ज्ञापन सौंपा। कमिश्नर दीपक रावत और जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को संबोधित ज्ञापन में कहा की चंदन हॉस्पिटल में मनमानी फीस वसूली जा रही है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में कई गड़बड़ियां हैं और यहां गरीबों के साथ अन्याय हो रहा है। एबीवीपी ने चंदन हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच करने व दोषी पाए जाने पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के साथ ही मरीजों की सुरक्षा के लिए पारदर्शी तंत्र स्थापित करने की मांग की है।
क्या बोले अस्पताल के जिम्मेदार?
चंदन हॉस्पिटल को लेकर सोमवार से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर अस्पताल के CEO राज गोपाल और डॉक्टर परवेज ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। परवेज ने कहा कि जो रील सोशल मीडिया पर घूम रही है उसमें सब कुछ सच नहीं है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल पहुंचने पर महिला की स्थिति नाजुक थी और वह वेंटिलेटर पर थीं। बकौल परवेज, महिला के बचने की संभावना कम थी और महिला के तीमारदारों ने तय किया कि वे उसे घर लेकर जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने मरीज को घर ले जाने की इजाजत दे दी थी।
परवेज के मुताबिक, इस दौरान फाइल कवर पर क्लेरिकल एरर की वजह से गलती से मृत लिखा गया जबकि अंदर डाक्यूमेंट्स में ऐसी कोई बात नहीं थी। उन्होंने बताया कि तीमारदार ने स्टाफ से फाइल को छीनकर वीडियो बनाया और वायरल किया था। उन्होंने कहा कि जिस कर्मचारी ने यह गलती की थी उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। बकौल परवेज, भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए कदम उठाए जाएंगे।











