एसटीएच में डॉक्टरों का बड़ा मोर्चा, इंटर्न-पीजी के बाद सीनियर रेजिडेंट भी हड़ताल पर…..

पांच दिन से इंटर्न, तीन दिन से पीजी रेजिडेंट आंदोलनरत; सीनियर रेजिडेंट के उतरने से बढ़ा दबाव — ₹30 हजार से ₹1 लाख तक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर डॉक्टरों का आंदोलन लगातार व्यापक होता जा रहा है। एमबीबीएस इंटर्न पांच दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, पीजी रेजिडेंट तीन दिन से आंदोलनरत हैं और अब शुक्रवार से सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल हो गए। तीनों श्रेणियों के डॉक्टरों के एक साथ आंदोलन में उतरने से अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ने लगा है।

एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर वर्तमान में मिल रहे ₹17 हजार मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30 हजार करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि महंगाई के दौर में भोजन, आवास, परिवहन और अन्य जरूरी खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद इंटर्न अस्पताल की ओपीडी, आईपीडी, वार्ड और इमरजेंसी सेवाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने स्टाइपेंड में समयबद्ध संशोधन की व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है।

पीजी डॉक्टरों की ₹1 लाख स्टाइपेंड की मांग

वहीं पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों ने न्यूनतम ₹1 लाख प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग उठाई है। उनका कहना है कि विशेषज्ञ प्रशिक्षण के साथ उन्हें वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, नाइट ड्यूटी और ऑन-कॉल सेवाओं में लगातार जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें वर्तमान में करीब ₹69,820 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि पढ़ाई के साथ आवास, भोजन, किताबें, शोध और अन्य पेशेवर खर्च भी वहन करने पड़ते हैं।

सीनियर रेजिडेंट भी मैदान में

इसी बीच अब सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी आंदोलन में शामिल होकर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। सीनियर रेजिडेंट वर्तमान में मिल रहे करीब ₹85 हजार मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। तीनों वर्गों के डॉक्टरों के एक साथ आंदोलन में आने से एसटीएच में स्टाइपेंड का मुद्दा अब बड़ा आंदोलन बन गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जा रहा है। उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि कार्यभार, जिम्मेदारियों और बढ़ती महंगाई के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड सुनिश्चित कराना है। डॉक्टरों ने सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग से मांगों पर जल्द निर्णय लेने की उम्मीद जताई है।

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