नैनीताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की सख्त भू-कानून नीति के तहत नैनीताल जिले में भूमि के दुरुपयोग के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देशन में उपजिलाधिकारी न्यायालय ने धार्मिक और कृषि प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग नहीं किए जाने के सात मामलों में बड़ा फैसला सुनाया है।
न्यायालय उपजिलाधिकारी नैनीताल ने उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की उत्तराखंड में लागू धारा 166/167 के तहत कार्रवाई करते हुए कुल 1.822 हेक्टेयर यानी 91 नाली 01 मुट्ठी भूमि राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए हैं।
उपजिलाधिकारी नवाजिश खलिक के अनुसार राजस्व अभिलेखों और स्थलीय जांच में ग्राम कमड़ा व शीतला, पट्टी मल्ली कुटौली में धार्मिक प्रयोजन के लिए खरीदी गई 1.562 हेक्टेयर भूमि पर कोई धार्मिक गतिविधि संचालित नहीं मिली। भूमि मौके पर खाली पड़ी थी। वहीं ग्राम सतबूंगा में कृषि प्रयोजन के लिए खरीदी गई 0.260 हेक्टेयर भूमि पर भी कृषि कार्य नहीं पाया गया और भूमि बंजर अवस्था में मिली।
प्रकरणों में संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने और अभिलेख व साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया। अनुमति की शर्तों, राजस्व अभिलेखों, स्थलीय जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद भूमि का निर्धारित प्रयोजन में उपयोग नहीं होना प्रमाणित हुआ।
इसके बाद सातों मामलों में भूमि अंतरण को विधि-विरुद्ध मानते हुए कुल 1.822 हेक्टेयर भूमि को सभी भारों से मुक्त कर राज्य सरकार में निहित करने का आदेश पारित किया गया। संबंधित राजस्व अधिकारियों को अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टियां दर्ज करने और आगे की नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि सरकार की मंशा भूमि क्रय-विक्रय प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत बनाना है। भू-कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।






